फॉसिल नहीं—फर्न: चीनी वैज्ञानिकों ने पहली बार फर्न में रेयर-अर्थ बायोमिनरलाइज़ेशन की खोज की

PNS Bureau :- 6 नवंबर 2025 · विज्ञान और पर्यावरण
चीनी शोधकर्ताओं ने एक बड़ी सफलता दर्ज की — उन्होंने खाद्य फर्न Blechnum orientale में दुर्लभ-धरती तत्वों (Rare Earth Elements, REEs) की जैविक रूप से खनिज (biomineralization) होने की पहली प्राकृतिक घटना पाई है, जो पारंपरिक खनन के पर्यावरणीय जोखिमों का हरित विकल्प दे सकती है।
खोज क्या बताती है?
शोध दल ने पाया कि यह फर्न मिट्टी से REEs को बहुत अधिक मात्रा में अवशोषित कर लेता है और पौधे की पत्तियों के बाह्य-ऊतक (extracellular tissues) में नैनोस्तरीय कणों के रूप में जमा करके, स्व-संगठन (self-organization) के साथ डेंड्रिटिक नैनो-मोनाज़ाइट (dendritic nanoscale monazite) बना देता है — वह खनिज जो औद्योगिक रूप से दुर्लभ-धरती तत्वों का स्रोत माना जाता है। इस प्रकार की जैविक मिनरलाइज़ेशन घटना प्राकृतिक पौधों में पहली बार दर्ज की गई है।
क्यों है यह महत्वपूर्ण?
- पर्यावरणीय लाभ: पारंपरिक रेयर-अर्थ खनन में भारी खनन, रासायनिक अपशिष्ट और रेडियोधर्मिता की समस्याएँ होती हैं — जबकि पौधों के माध्यम से (phytomining) यह कम प्रदूषण और कम ऊर्जा-खपत वाला विकल्प हो सकता है।
- निरापद उत्पाद: शोध में बने ‘जैविक मोनाज़ाइट’ में प्राकृत यूरेनियम/थोरियम जैसी रेडियोधर्मी नदियाँ नहीं पाई गईं — इससे उसे औद्योगिक उपयोग के लिए साफ़ और सरल बनाया जा सकता है।
- मलबा—मिट्टी सुधार और संसाधन पुनर्प्राप्ति: ऐसे हाइपरएक्यूमुਲੇटर पौधे दूषित मिट्टी और खनन-टेलिंग्स की बहाली करने के साथ-साथ अपने बीयोमैस (biomass) से मूल्यवान REEs को भी वापस निकालने का मार्ग खोलते हैं।
शोध और पद्धति
टीम ने इस खोज के लिए फ़िल्टोमाइनिंग (phytomining) जैसी हरित तकनीक का उपयोग किया — अर्थात् ऐसे पौधों को उगाकर जो मिट्टी से धातुओं को तेज़ी से जमा कर लेते हैं, फिर पौधों से धातु वसूली की जाती है। लेख प्रकाशित हुआ है Environmental Science & Technology में, और शोध में तंत्र (mechanism) की व्याख्या की गई है कि पौधे कैसे REEs को बेअसर कर (detoxify) के जमा कर लेते हैं।
आगे का रास्ता
शोधकर्ता बताते हैं कि यह खोज लगभग एक हजार ज्ञात हाइपरएक्यूमुलेटर पौधों के अध्ययन के लिए नई खिड़की खोलती है — यदि और पौधों में भी इसी तरह की प्रक्रियाएँ पाई जाएँ तो REEs की हरित व सस्टेनेबल आपूर्ति सम्भव हो सकती है। साथ ही यह नीतिगत, औद्योगिक और जैवप्रौद्योगिकीय निवेश की दिशा भी बदल सकती है।




